13 March, 2022

धत्तेरिका रूपक

 किञ्चित  सुख पाओस् उसले उन्मत्त भै गयाे,

दुःख, कष्ट त चिन्ता भाे संसार सकिई गयाे ।

कर्मकाे छैन वास्ता, दिन आलस गरी दियाे,

काल काल यसै बित्याे, महाकाल ल आइ गाे ।।

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